20170916

प्रेतात्मा की गवाही

रात्रि की स्याह कालिमा घने बादलों एवं धुँध भरे कोहरे से मिलकर वातावरण को किंचित रहस्यमय बना रही थी। हल्की सी बूँदा-बाँदी और सुनसान निर्जनता इस रहस्यमयता में किसी अनजाने भय की सृष्टि कर रही थी। लगता है इस वातावरण का प्रभाव उस व्यक्ति पर था, जो इस समय घोड़े पर बैठा हुआ इस निर्जन क्षेत्र से गुजर रहा था। रह-रहकर उसके समूचे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ जाती थी। कह नहीं सकते यह सिहरन ठण्ड के कारण थी अथवा भय के कारण या फिर उस पर ठण्ड और भय का ही मिला-जुला असर था। सत्य जो कुछ भी हो, पर अभी उसे अपने घर पहुँचने की जल्दी थी। इसी कारण वह जब-तब घोड़े को एड़ लगाकर उसे तीव्र गति से दौड़ने के लिए प्रेरित कर रहा था।

शीर्षासन का महत्व

आसनों का महत्व साधारण व्यायाम से बहुत अधिक है। तभी तो योग के आठ अंगों में उन्हें स्थान दिया गया है। यदि उनमें विशेषता न होती तो कोई भी व्यायाम योग का अंग बन जाता। कारण यह है कि निर्बल शरीर वाले, बुद्धि जीवी, रोगी, बालक, स्त्रियाँ, बुड्ढे सभी के लिए आसनों का व्यायाम ऐसा है जो बिना किसी प्रकार की अनावश्यक शक्ति हरण किये शरीर के मन्द हुए कल पुर्जों को आसानी से चला देता है। साधारण व्यायाम में यह बात नहीं है। डंड बैठक करने के बाद आदमी थक जाता है और सुस्ती आती है किन्तु आसनों के बाद प्रफुल्लता और फुर्ती का उदय होता है।

सच्ची इबादत

खलीफा उमर एक दिन मगरब को नमाज पढ़ रहे थे। उनने देखा कि—आसमान में एक फरिश्ता मोटी बही बगल में दबाये उड़ा चला आ रहा है। उनने फरिश्ते को पुकारा और उस मोटी बही में क्या लिखा है यह पूछा? फरिश्ते ने कहा—’इसमें उन लोगों की नामावली है जो खुदा की इबादत करते हैं।” खलीफा को आशा थी कि उसमें उनका नाम जरूर होगा। इसलिए उनने पूछा—भाई, जरा देखना मेरा भी नाम इस बही में है न? सारी बही उलट-पलट कर देखने पर भी जब उनका नाम न मिला तो फरिश्ते ने शिर हिला दिया। खलीफा बहुत निराश हुए। जीवन भर खुदा के लिए काम करते रहने पर भी उनका नाम इबादत करने वालों की नामावली में शामिल न हो सका। 

कुछ दिन बाद उसने फिर एक ऐसे ही फरिश्ते का आकाश में उड़ते देखा जिसके हाथ में एक छोटी-सी पुस्तक थी। खलीफा ने उसे भी पुकारा और उस पुस्तक में क्या लिखा है यह पूछा? फरिश्ते ने कहा—’इसमें उन लोगों के नाम दर्ज हैं जिनकी इबादत खुदाबन्द करीम करते हैं।’ खलीफा को बड़ा आश्चर्य हुआ कि क्या कोई ऐसे लोग भी हो सकते हैं जिनकी इबादत खुदा खुद करे। पुस्तक का पहला पन्ना खोला गया तो उसमें सबसे पहला नाम खलीफा उमर का ही था। फरिश्ते ने कहा—जो लोग खुदा के मकसद को पूरा करने में, उसकी दुनिया को अच्छा बनाने में लगे रहते हैं उनकी भक्ति सचमुच इतनी ही ऊँची है कि खुदा को उनकी इबादत खुद करनी पड़े।

- Akhand Jyoti